हम अलग हो सकते हैं, ग़लत नहीं

हम अलग हो सकते हैं, ग़लत नहीं

आपका समाज की नज़रों में अच्छा होना ज़रूरी नहीं, ख़ुद की नज़रों में सुंदर होना ज्यादा ज़रूरी है

हर्षित सिंह

जब से मैंने होश सम्भाला है तब से मेरी यादें कुछ ऐसी रहीं हैं कि कभी किसी दोस्त, कभी घर आये रिश्तेदार, कभी कोई अजनबी मेरा मज़ाक़ उड़ा रहा होता है। 

मज़ाक़ के पात्र

मेरी लड़कियों जैसी आवाज़ को ले कर, मेरी अलग सी पसंद को ले कर, स्पोर्ट्स में ना जा कर मेरा आर्ट्स में होना और ना जाने क्या क्या। 

कितनी ही बार जान बूझ कर दुकान वाले लड़कों की जगह लड़कियों के जूते कपड़े दिखाने लग जाते थे। 

कैसे सब मिलकर मेरे आत्मविश्वास को तोड़ने की पूरी कोशिश करते थे। 

हद तो तब हुई जब छोटी सी दुनियाँ से निकल कर बड़े शहर आना हुआ। ना जाने कितने नये शब्द सुनने को मिले। ये तो मीठा है, छक्का है, तालियों वाला है पता नहीं क्या क्या।

मुझे मेरी सेक्सुअलिटी के बारे में स्कूल के समय से ही मालूम था पर ना तो कभी किसी ने तसल्ली से बात की ना ही मैंने किसी को कुछ बताया।

कम उम्र में ज्यादा अनुभव करना भी तभी से ही शुरू हो गया था। ख़ुद को ख़ुद से कैसे संभालना है ये मैंने अपने दादा दादी से सीखा। 

पढ़ाई के साथ साथ काम

कोई काम बड़ा या छोटा नहीं होता है। मैंने पढ़ाई के साथ साथ जॉब करना, लिखना, अपनी कला पर काम करना स्कूल के बाद से ही शुरू कर दिया था। 

मेरे हिसाब से कभी भी ख़ुद को एक डिब्बे में बंद नहीं करना चाहिए, ख़ुद को पंख देना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना दोनों ही बहुत ज़रूरी है। 

आपका समाज की नज़रों में अच्छा होना ज़रूरी नहीं, ख़ुद की नज़रों में सुंदर होना ज्यादा ज़रूरी है।

ख़ुद को वक़्त दो और पहले ख़ुद से प्यार करो कोई साथ हो या ना हो।

जब भीड़ आप पर हँस रही हो उस वक्त इक लंबी साँस लो और गर्व से सिर ऊपर कर के वहाँ से निकलो।

मैं एक सोलो ट्रैवलर भी हूँ। सिर्फ़ ख़ुद को और मज़बूत बनाने के लिए और नये अनुभव करने के लिए मैं ये करता हूँ। मैंने अब तक आठ राज्य अकेले घूमें है, बाक़ी और भी घूमने हैं।

कहानीकार 

मेरी कहानियों में अक्सर समाज का ज़िक्र होता है और अब वो ही समाज मेरे शोस में हँसता नहीं तालियाँ बजाता है।

मैं एलजीबीटीक्यूआईए+ कम्युनिटी का गर्व से हिस्सा हूँ। मैं एक होमोसेक्सुअल हूँ। मैं भी एक ज़िंदगी जीता हूँ जिस पर लिखने बैठूँ या बताने बैठूँ तो ना जाने कितना समय लगे।

हर दिन लगता है अपनी कला के ज़रिये अपनी कम्युनिटी के लिए कुछ कर पाऊँ। उनको आम इंसान जैसे हक़ दिलाने की क़लम बन पाऊँ। 

अप्रैल 16, 2023 को  मॉडर्न पोएट्स (@themodernpoets7) के साथ मिलकर हमने एक ऐसे ही सपने को उड़ान दी। हिंदुस्तान का पहला कविता और कहानी सुनाने का शो (Poetry and Storytelling Show) जो ट्रांसज़ेंडर कम्युनिटी के लिये था वो हम ले कर आये। सभी की भागीदारी और मेहनत से एक ऐसा शो जो ना तो पहले किसी ने सुना था ना ही देखा था। ये कला की जीत थी क्योंकि कला का कोई लिंग नहीं होता, स्टेज का हक़ सबको है।

उम्मीद है ये शो और आगे बड़ें और कम्युनिटी से और कलाकारों को स्टेज़ मिले। आप भी आना इनको सुनने और देखने, बदलाव का हिस्सा बनने, इंतज़ार रहेगा। 

माता-पिता के लिये संदेश अक्सर हमारी सच्चाई हमारे माता-पिता उनकी परवरिश की गलती समझ बैठते हैं। हमें कुछ भी नहीं सिर्फ़ उनका साथ चाहिए होता है। जो दर्द उनको हमारी सेक्सुअलिटी जान कर होता है, वो दर्द ना जाने उनके बच्चे कब से जीते आ रहें हैं, समाज से हर दिन लड़ते आ रहें हैं। इसी लड़ाई में अगर हमारे माता-पिता हमारे साथ हों तो सब आसान हो जाता है। आपके बच्चे आपका ही अंश हैं, वो अलग हो सकते है पर वो ग़लत नहीं हैं।