हम अलग हो सकते हैं, ग़लत नहीं

आपका समाज की नज़रों में अच्छा होना ज़रूरी नहीं, ख़ुद की नज़रों में सुंदर होना ज्यादा ज़रूरी है हर्षित सिंह जब से मैंने होश सम्भाला है तब से मेरी यादें कुछ ऐसी रहीं हैं कि कभी किसी दोस्त, कभी घर आये रिश्तेदार, कभी कोई अजनबी मेरा मज़ाक़ उड़ा रहा होता है। मज़ाक़ के पात्र मेरी […]