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ऐसे बूढ़े पेड़ जिनकी छाँव के नीचे छोटे पौधे उगते हैं 

ज़िंदगी में जब चारों तरफ़ अंधेरा ही अंधेरा होता है, उस वक़्त झुरियों वाले हाथ प्यार और उम्मीद कि टॉर्च लिए खड़े होते हैं हर्षित सिंह मेरा जन्म 2001 में हुआ है। पुराना ज़माना, रहन सहन क्या होता था वो मैंने देखा तो नहीं था मगर हाँ मैंने जिया ज़रूर है। हमारी पीढ़ी टेक्नोलॉजी से इतना जुड़ चुकी है की अब उसको ख़ुद के लिए भी वक़्त नहीं मिलता, अक्सर आपने देखा होगा एक छोटा बच्चा आपसे ज़्यादा आपके मोबाइल के बारे में जानता होगा और दिन भर उसी में लगा रहता होगा, अब दोस्त कम बनते है, पढ़ाई भी ऑनलाइन हो जाती है, इत्यादि। ये कैसी भागती दौड़ती ज़िंदगी है? मगर ऐसी ज़िंदगी में भी आपको धीमी गति वाली ज़िंदगी जीना सिखाते है आपके दादा दादी।  असल परवरिश  परिवार में असल परवरिश की एक अहम भूमिका वो निभाते है। जो आप उनसे सीख सकते है वो दुनियाँ में कहीं और नहीं सीख सकते।  मैं बचपन से अपने घर से दूर रहा हूँ मगर फिर भी अगर घर में मैंने सबसे ज़्यादा  किसी के साथ वक़्त बिताया है तो वो मेरे दादा दादी ही हैं।

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